वैदिक कुंडली दोष निवारण महाकेन्द्र
कालसर्प, मांगलिक, शनि साढ़े साती व पितृ दोष की प्रामाणिक तीर्थ शांति — ₹1,100 से प्रारंभ
यदि आपकी कुंडली में ग्रह प्रतिकूल चल रहे हैं या जीवन में निरंतर अज्ञात बाधाएं आ रही हैं, तो सिद्ध तीर्थ पुरोहितों द्वारा अपने नाम व गोत्र से विधिवत वैदिक शांति कराएं।
क्या आपकी कुंडली में भी कोई ग्रह दोष है?
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प्रमुख कुंडली दोष: लक्षण व वैदिक निवारण
नीचे दिए गए दोषों का चयन करें और जानें कि आपकी कुंडली में कौन सा ग्रह कष्ट दे रहा है और उसका शास्त्रोक्त उपाय क्या है:
कालसर्प दोष के प्रमुख लक्षण
शास्त्रोक्त निवारण विधान:
उज्जैन महाकाल वन क्षेत्र या त्र्यंबकेश्वर में 12 प्रकार के कालसर्प दोष निवारण हेतु चांदी के नाग-नागिन जोड़े का वैदिक पूजन व महामृत्युंजय संपुटित हवन।
प्रसिद्ध तीर्थों में संपन्न होने वाली दोष निवारण महापूजाएँ
उज्जैन, काशी, गया और शनि शिंगणापुर के अधिकृत तीर्थ पुरोहितों द्वारा नाम-गोत्र संकल्प व वीडियो प्रमाण सहित:
प्रभु प्रसाद दोष निवारण — 4 प्रामाणिक वैदिक प्रतिज्ञाएँ
हमारा उद्देश्य कर्मकांडीय शुद्धता और भक्तों का पूर्ण कल्याण है:
1. व्यक्तिगत नाम-गोत्र संकल्प
प्रत्येक पूजा में यजमान का नाम, गोत्र व मनोकामना का स्पष्ट वैदिक उच्चारण किया जाता है। सामूहिक औपचारिकता नहीं होती।
2. सिद्ध मूल तीर्थों पर पूजा
मंगल शांति केवल मंगलनाथ उज्जैन, कालसर्प केवल महाकाल वन, और पितृ शांति केवल गया जी/हरिद्वार में ही संपन्न की जाती है।
3. HD संकल्प वीडियो प्रमाण
पूजा संपन्न होने के पश्चात पुरोहितों द्वारा उच्चारित नाम-गोत्र संकल्प का स्पष्ट वीडियो आपके WhatsApp पर भेजा जाता है।
4. पवित्र प्रसाद घर डिलीवरी
तीर्थ क्षेत्र का पवित्र भस्म, रक्षा सूत्र, अभिमंत्रित ताबीज व प्रसाद सुरक्षित रूप से आपके घर के पते पर भेजा जाता है।
समझ नहीं आ रहा कि कौन सी पूजा आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है?
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कुंडली दोष निवारण — श्रद्धालुओं के मुख्य प्रश्न
क्या घर बैठे ऑनलाइन दोष निवारण पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है?
हाँ। वैदिक शास्त्रों के अनुसार संकल्प में यजमान का नाम, गोत्र और निवास स्थान का उच्चारण मुख्य होता है। तीर्थ पुरोहित यजमान के प्रतिनिधि (ऋत्विक) के रूप में तीर्थ क्षेत्र में आहुति व अर्चन समर्पित करते हैं। संकल्प का वीडियो और रक्षा सूत्र आपके पास भेजा जाता है।
उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा ही क्यों की जाती है?
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के अनुसार मंगल ग्रह की उत्पत्ति उज्जैन की पावन भूमि पर भगवान शिव के ललाट से गिरे पसीने की बूंद से हुई थी। मंगल उग्र व अग्नि तत्व प्रधान ग्रह हैं। उबले हुए शीतल चावल (भात) का शिवलिंग पर लेप करने से मंगल का ताप शांत होता है और मांगलिक दोष का शमन होता है।
कालसर्प दोष और पितृ दोष में क्या मुख्य अंतर है?
कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी सात ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं। यह व्यक्ति के स्वयं के पूर्व जन्मों के कर्मों का फल है। जबकि पितृ दोष पूर्वजों की अतृप्त इच्छाओं, श्राद्ध न होने या कुल में किसी अतृप्त आत्मा के कारण उत्पन्न होता है, जिसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है।
पूजा के कितने दिन बाद फल की अनुभूति होती है?
दोष शांति के उपरांत सामान्यतः 21 से 45 दिनों (एक वैदिक मंडल काल) के भीतर मानसिक शांति, रुके हुए कार्यों में गति और बाधाओं के निवारण के स्पष्ट संकेत मिलने लगते हैं।




